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Download "Deepavali" दीपावली (हिन्दी निबन्ध) - Hindi Essay For Odisha School Students

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दीपावली हिन्दू समाजका प्रमुख पर्व है । हेमंत की गुलाबी ऋतुमें कार्तिक अमाबसके दिन वह त्योहार मनाया जाता है । वह मुख्यतः दीप पर्व है । अंधकार पर प्रकाश की विजय इस पर्व का सांस्कृतिक अभिप्राय है ।

दीपावली या दीवाली देशभर में और विभिन्न संप्रदायों में हर्ष और उलास के साथ मनाई जाती है, इसकी अनेक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मान्यताएँ हैं । 

पौराणिक वर्णन के अनुसार मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचन्द्र लंका विजय कर इसी दिन अयोध्या लौटे थे। उनके स्वागत में साकेत भवन में दीपमालाएँ सजाई गई थीं । अमावस की अंधेरी रात को दीप शीखा से प्रकाशित करने की एक परंपरा बनगई। इसी दिन माता काली का पूजन भी होता है। पुनश्च, उलेख मिलता है कि द्वापर में भगवान श्रीकृष्ण ने दुष्ट बकासुर का वध किया था । नारक नामके असुर का भी इस दिन संहार हुआ था । कहा जाता है कि महाराज युधिष्ठिर ने राजसूय यज्ञ अनुष्ठान इसी दिन किया था । 

दीपावली जैनियों का भी महान् धार्मिक पर्व है। जैन धर्म के २४ वें तीर्थकर महावीर स्वामी का 'पावा" में इसी दिन महाप्रयाण हुआ था । वहाँ काशी, कोशल, कोशाम्बी, लिच्छवी आदि जनपदों के राजाओं ने धर्मस्तुप का निर्माण करवाया और इस ज्योति पर्व को मनाया जो आज तक प्रचलित है । बौद्ध लोग भी इसे ज्योति पर्व के रूप में मनाते हैं और द्विप जलाते हैं । ओड़ीशा में इस दिन पितर लोगों को याद करके श्राद्ध करते हैं । घी के दीपक जलाकर उन्हें बुलाते हैं । यह पर्व सिक्ख धर्म के आदि गुरु नानक जी, स्वामी रामतीर्थ और स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के महानिर्वाण दिबसकी स्मृति से भी जुड़ा है । 

साँझ ढ़लते ही यह पर्व शुरू हो जाता है। घर, आँगन, दरवाजे, दूकान, बैठकी, छत, मुण्डेर, गुम्बद, बरामदे चारों और दीपमालाएँ सजाई जाती हैं । आजकल बिजली के बल्ब की मालाएँ, रंग-बिरंगी रोशनी की कलाएँ दीखाती हैं । मोमबती की कतारें भी लगाई जाती हैं। पटाखे, फुलझरी, आतसबाजी चलाने का दौर रात भर चलता है। चारों ओर प्रकाश पुंज, दीपों की सजावट, बिजली के अनोखे खेल से धरती जगमगाती है। लोग रात भर उनींदी बिता देते हैं। यह लक्ष्मी पूजन का दिन है। कहा जाता है कि रात को माता लक्ष्मी घूमती हैं। घर-घर में तरह तरह की मिठाइयाँ और खीर-पकवान भी बनते हैं। व्यापारी समाज इसे नए वर्ष के रूप में मनाता है और मित्रों को मिठाइयाँ बाँटता है।

और भी, दीपपर्व के कारण नाना प्रकार के अहितकारी कीड़े-मकोड़े नष्ट हो जाते हैं और परिवेश शुद्ध हो जाता है । दीपावली सामाजिक और पारिवारिक जीवन में खुशी ही खुशी लाती है।
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